सरस्वती वंदना
जय जय जय सरस्वती माता
कृपा मिली तो गायन आवे
तालु छःन्द स्वर मिश्रित गावे
सुमिरन तेरा नित जो लाता
विद्या बुद्धि स्वयं पा जाता ।
जय जय जय सरस्वती माता
कुमति दूर कर सुमति लावो
वाणी को तुम मधुर बनाओ
जो भी तुम्हारी स्तुति गाता
स्वर को सदा मधुर ही पाता
जय जय जय सरस्वती माता,
अध्य्यन से नित तेरा नाता
लेखक कवि तुमको ही ध्याता
तुम्हरे दर्श से जीवन पाता
सफल मार्ग तब मिल जाता।
जय जय जय सरस्वती माता।
हेमचंद्र जोशी
कृपा भई सब ग्रन्थ लिखाने
वेद पुराण कृपा से आने
याचक भी दाता बन जाता
तेरी कृपा जो जग में पाता।
जय जय जय सरस्वती माता।
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